अधिकार और कर्तव्य एक गाड़ी के दो पहिये हैं: श्री विक्रांत खंडेलवाल शिक्षकों को संवेदनशील होना अत्यंत आवश्यक: श्री विक्रांत खंडेलवाल कर्तव्यशील नागरिक बनाना शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए: श्री विक्रांत खंडेलवाल शिक्षकों की गोद में ही देश के भविष्य का निर्माण होता हैं: श्री विक्रांत खंडेलवाल भोपाल । एनआईटीटीटीआर भोपाल भारतीय ज्ञान परम्परा विभाग द्वारा विषय “नागरिक कर्तव्यों में शिक्षकों की भूमिका” पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता श्री विक्रांत खंडेलवाल, संगठन मंत्री, भारत विकास परिषद थे। श्री खंडेलवाल ने भारतीय शिक्षा दर्शन की अवधारणा को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए कहा कि संवेदना के बिना निर्माण नहीं हो सकता इसलिए शिक्षकों को संवेदनशील होना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षक को अपने कार्य का मूल्यांकन स्वयं करना चाहिए और शिक्षा को न केवल अधिकार, बल्कि कर्तव्य के रूप में भी देखना चाहिए। "अधिकार और कर्तव्य एक गाड़ी के दो पहिये हैं" अधिकार तभी सही है जब हम अपने कर्तव्यों को पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं और हम सभी को प्रकृति को वापस देने का मानस बनाना चाहिए। ...