Skip to main content

एनआईटीटीटीआर भोपाल का 2025-2026 का एकेडेमिक कैलेंडर जारी

भोपाल। एनआईटीटीटीआर भोपाल के वर्ष 2025-2026 के वार्षिक अकादमिक ट्रेनिंग प्रोग्राम के कैलेन्डर को  निदेशक प्रो. सी.सी त्रिपाठी द्वारा जारी किया गया। प्रो.  त्रिपाठी  ने इस अवसर पर कहा कि इस नए अकादमिक वर्ष में कुल 326 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, विकसित भारत 2047 पहल, पीएम गति शक्ति कार्यक्रम, कैपेसिटी बिल्डिंग, उभरती हुई तकनीकें, उद्योग केंद्रित प्रशिक्षण, और आउटकम-आधारित शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। कार्यक्रमों की योजना विभिन्न राज्यों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है, जिनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान, और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए समर्पित विशेष कार्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा, समय-समय पर मांग के आधार पर भी अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सहायक कर्मचारियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, ताकि उनके कौशल और क्षमता को बेहतर बनाया जा सके। साथ ही, पूरे वर्षभर हिंदी कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि हिन्दी भाषा में दक्षता बढ़ाई जा सके। सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संस्थान के लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (ई-प्रशिक्षण) के माध्यम से आयोजित किया जाएगा, जिससे पूरे देशभर में इन कार्यक्रमों की व्यापक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। यह प्रणाली डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में एक सशक्त माध्यम है, जो सभी प्रतिभागियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण सामग्री तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे उनकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होता है। 

इस अवसर पर  निटर के डीन प्रो संजय अग्रवाल, प्रो. पी.के पुरोहित,  प्रो. चंचल मेहरा, प्रो. हुसैन जीवाखान, डॉ. प्रकाश हरदाह, श्री जितेन्द्र चतुर्वेदी एवं अन्य फैकल्टी व स्टाफ मेंबर्स के साथ उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश से प्रो. धीरेन्द्र शुक्ला, प्रो. संतोष भार्गव, प्रो. अजय अग्रवाल भी उपस्थित थे।

Comments

मध्यप्रदेश समाचार

देश समाचार

Popular posts from this blog

आधे अधूरे - मोहन राकेश : पाठ और समीक्षाएँ | मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे : मध्यवर्गीय जीवन के बीच स्त्री पुरुष सम्बन्धों का रूपायन

  आधे अधूरे - मोहन राकेश : पीडीएफ और समीक्षाएँ |  Adhe Adhure - Mohan Rakesh : pdf & Reviews मोहन राकेश और उनका आधे अधूरे - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा हिन्दी के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न नाट्य लेखक और कथाकार मोहन राकेश का जन्म  8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में  हुआ। उन्होंने  पंजाब विश्वविद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम ए उपाधि अर्जित की थी। उनकी नाट्य त्रयी -  आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे भारतीय नाट्य साहित्य की उपलब्धि के रूप में मान्य हैं।   उनके उपन्यास और  कहानियों में एक निरंतर विकास मिलता है, जिससे वे आधुनिक मनुष्य की नियति के निकट से निकटतर आते गए हैं।  उनकी खूबी यह थी कि वे कथा-शिल्प के महारथी थे और उनकी भाषा में गज़ब का सधाव ही नहीं, एक शास्त्रीय अनुशासन भी है। कहानी से लेकर उपन्यास तक उनकी कथा-भूमि शहरी मध्य वर्ग है। कुछ कहानियों में भारत-विभाजन की पीड़ा बहुत सशक्त रूप में अभिव्यक्त हुई है।  मोहन राकेश की कहानियां नई कहानी को एक अपूर्व देन के रूप में स्वीकार की जाती ...

खाटू नरेश श्री श्याम बाबा की पूरी कहानी | Khatu Shyam ji | Jai Shree Shyam | Veer Barbarik Katha |

संक्षेप में श्री मोरवीनंदन श्री श्याम देव कथा ( स्कंद्पुराणोक्त - श्री वेद व्यास जी द्वारा विरचित) !! !! जय जय मोरवीनंदन, जय श्री श्याम !! !! !! खाटू वाले बाबा, जय श्री श्याम !! 'श्री मोरवीनंदन खाटू श्याम चरित्र'' एवं हम सभी श्याम प्रेमियों ' का कर्तव्य है कि श्री श्याम प्रभु खाटूवाले की सुकीर्ति एवं यश का गायन भावों के माध्यम से सभी श्री श्याम प्रेमियों के लिए करते रहे, एवं श्री मोरवीनंदन बाबा श्याम की वह शास्त्र सम्मत दिव्यकथा एवं चरित्र सभी श्री श्याम प्रेमियों तक पहुंचे, जिसे स्वयं श्री वेद व्यास जी ने स्कन्द पुराण के "माहेश्वर खंड के अंतर्गत द्वितीय उपखंड 'कौमारिक खंड'" में सुविस्तार पूर्वक बहुत ही आलौकिक ढंग से वर्णन किया है... वैसे तो, आज के इस युग में श्री मोरवीनन्दन श्यामधणी श्री खाटूवाले श्याम बाबा का नाम कौन नहीं जानता होगा... आज केवल भारत में ही नहीं अपितु समूचे विश्व के भारतीय परिवार ने श्री श्याम जी के चमत्कारों को अपने जीवन में प्रत्यक्ष रूप से देख लिया हैं.... आज पुरे भारत के सभी शहरों एवं गावों में श्री श्याम जी से सम्बंधित संस्थाओं...

दुर्गादास राठौड़ : जिण पल दुर्गो जलमियो धन बा मांझल रात - प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा

अमरवीर दुर्गादास राठौड़ : जिण पल दुर्गो जलमियो धन बा मांझल रात। - प्रो शैलेन्द्रकुमार शर्मा माई ऐड़ा पूत जण, जेहड़ा दुरगादास। मार मंडासो थामियो, बिण थम्बा आकास।। आठ पहर चौसठ घड़ी घुड़ले ऊपर वास। सैल अणी हूँ सेंकतो बाटी दुर्गादास।। भारत भूमि के पुण्य प्रतापी वीरों में दुर्गादास राठौड़ (13 अगस्त 1638 – 22 नवम्बर 1718)  के नाम-रूप का स्मरण आते ही अपूर्व रोमांच भर आता है। भारतीय इतिहास का एक ऐसा अमर वीर, जो स्वदेशाभिमान और स्वाधीनता का पर्याय है, जो प्रलोभन और पलायन से परे प्रतिकार और उत्सर्ग को अपने जीवन की सार्थकता मानता है। दुर्गादास राठौड़ सही अर्थों में राष्ट्र परायणता के पूरे इतिहास में अनन्य, अनोखे हैं। इसीलिए लोक कण्ठ पर यह बार बार दोहराया जाता है कि हे माताओ! तुम्हारी कोख से दुर्गादास जैसा पुत्र जन्मे, जिसने अकेले बिना खम्भों के मात्र अपनी पगड़ी की गेंडुरी (बोझ उठाने के लिए सिर पर रखी जाने वाली गोल गद्देदार वस्तु) पर आकाश को अपने सिर पर थाम लिया था। या फिर लोक उस दुर्गादास को याद करता है, जो राजमहलों में नहीं,  वरन् आठों पहर और चौंसठ घड़ी घोड़े पर वास करता है और उस पर ही बैठकर बाट...