विश्व यक्ष्मा दिवस पर जागरूकता संदेश कार्यक्रम
"टीबी हारेगा, देश जितेगा" - प्रो. अर्पण भारद्वाज, कुलगुरु
उज्जैन। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान (जेएनआईबीएम) में विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज, कुलगुरु, विक्रम विश्वविद्यालय ने शुभकामना संदेश देते हुए एसडीजी लक्ष्य 3.3 को प्रमुखता से रेखांकित किया, जिसके तहत एड्स, तपेदिक, मलेरिया और उपेक्षित बीमारियों को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही, **हेपेटाइटिस, जल-जनित रोगों और अन्य संचारी रोगों से 2030 तक निपटने के उद्देश्य से जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया।
एसडीजी लक्ष्य 3.3 पर जोर
प्रो. अर्पण भारद्वाज ने अपने संदेश में कहा कि, भारत को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में हम सभी को सामूहिक रूप से कार्य करना होगा। उन्होंने एसडीजी लक्ष्य 3.3 के तहत तपेदिक (टीबी) के उन्मूलन के लिए जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान** के निदेशक, विद्यार्थियों, स्टाफ और छात्रों को उनके सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम में प्रो. डॉ. दीपक गुप्ता, अध्यक्ष, प्रबंध अध्ययन मंडल, विक्रम विश्वविद्यालय ने टीबी उन्मूलन अभियान की सराहना की। इसके साथ ही कार्यपरिषद सदस्य प्रो. डॉ. कामरान सुल्तान और डॉ. सचिन राय ने इस जागरूकता प्रसंग पर खुशी जताई और इसे आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयासों को प्रोत्साहित किया।
भारत का 2025 तक टीबी उन्मूलन का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता, निदेशक, पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, विक्रम विश्वविद्यालय ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (यूएनएसडीजी) के हस्ताक्षरकर्ता के रूप में टीबी को समाप्त करने के लिए 2030 तक का समय सीमा निर्धारित किया था, लेकिन अब यह लक्ष्य 2025 तक प्राप्त करने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस लक्ष्य के तहत भारत ने 2015 के स्तर की तुलना में टीबी के मामलों में 80% की कमी करने का लक्ष्य रखा है और टीबी मृत्यु दर में 90% की कमी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
अंत में, डॉ. नयनतारा डामोर, संकाय सदस्य, विक्रम विश्वविद्यालय ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस अभियान में सभी के योगदान की सराहना करते हुए इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाना और इस गंभीर बीमारी के उन्मूलन के लिए समाज के हर वर्ग को जोड़ना था। "टीबी हारेगा, देश जितेगा" का यह संदेश हर किसी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
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