विक्रम विश्व विद्यालय अब सम्राट विक्रमादित्य विश्व विद्यालय के नाम से जाना जाएगा – मुख्यमंत्री डॉ यादव
विक्रम विश्वविद्यालय का 29 वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विश्वविघालय के द्वारा डी लिट् की उपाधि प्रदान की गई
70 विघार्थियों को उपाधि, 99 को मेडल और 02 शोधार्थियों को डी लिट् की उपाधि प्रदान की गई
उज्जैन। रविवार, 30 मार्च को भारतीय नववर्ष की प्रतिपदा के अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में विक्रम विश्वविद्यालय का 29वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। समारोह का आयोजन विक्रम विश्व विद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में किया गया।
कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्री पटेल ने इस अवसर पर कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में सम्मिलित हो कर अत्यधिक आनन्द का अनुभव हो रहा है। इस दीक्षान्त समारोह में अपनी उपाधियाँ प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को मैं आत्मीय बधाई देते हुए आप सभी के यशस्वी एवं मंगलमय भविष्य की कामना करता हूँ। यह दीक्षांत समारोह वास्तव में सेवा का संकल्प समारोह है। जीवन में सफलता के लिए कठोर अनुशासन की आवश्यकता होती है।
शिक्षा, धर्म, साहित्य, संस्कृति, विज्ञान तथा व्यापार के क्षेत्रों में भारतवर्ष के मानचित्र पर उज्जैन की अपनी विशिष्ट पहचान है। शिप्रा के पवित्र तट पर बसे इस नगर में विद्याध्ययन की अभिलाषा से आये श्रीकृष्ण की कथा पूरे संसार में प्रसिद्ध है। महर्षि सान्दीपनि के गुरुकुल का यह पुरातन क्षेत्र आज भी जन-जन की आस्था का केन्द्र है, जहाँ स्वयं जगद्गुरु ने शिक्षा पायी थी।
वर्तमान समय में ज्ञान विज्ञान के अनेक नवीन क्षेत्र प्रकाश में आ रहे हैं। पारम्परिक विषयों के साथ-साथ अनेक नवीन विषयों में उच्च शिक्षा के नये आयाम विकसित हुए हैं। भारत के प्रतिभासम्पन्न छात्र छात्राओं ने विश्वफलक पर अपनी प्रतिभा तथा क्षमता को अपने समूचेपन में प्रकाशित किया है।
दीक्षित होने वाले विघार्थी अपने माता-पिता और गुरुजनों का आजीवन सम्मान करे। माता-पिता कई कष्टों को झेलकर अपने बच्चों का पालन-पोषण और शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था करते हैं। अत: जीवन में अपने माता-पिता का सदैव सम्मान करें और उनकी सेवा करें। तभी हम अपने समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकेगें और हमारा जीवन बेहतर होगा। एक अच्छे और जिम्मेदार नागरिक बन कर हम अपने देश की प्रगति में योगदान दे सकेगें।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि आज का दिन कई कारणों से हम सब के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। उज्जैन नगरी सात पवित्रतम नगरियों में से एक है। हर कल्प में इसका विशेष महत्व रहा है।आज भारतीय नव वर्ष प्रतिपदा पर हम सब हर्षोल्लास के साथ गुड़ी पड़वा और चैटी चंड का पर्व मना रहे हैं। आज उज्जैन का गौरव दिवस भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को अपनी ओर से बधाई दी। उन्होंने कहा कि जिन विघार्थियों को उपाधि प्रदान कि गई है, वे अपनी प्रतिभा का उपयोग अभीष्ट उद्देश्य की प्राप्ती के लिए करें। समाज सेवा और अपने राष्ट्र कि सेवा करें। भविष्य कि अपार संभावनाएं आपका इंतजार कर रही हैं। हमारे शोधार्थी विश्व के पटल पर अपने शहर, राज्य और देश का नाम लेकर जाएं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माधव विज्ञान महाविघालय के परिसर में आने वाले समय में और विशाल सभागार बनाया जाएगा। विक्रम विश्व विघालय अब सम्राट विक्रमादित्य के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोधार्थियों को अपनी ओर से शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री डॉ यादव और राज्यपाल श्री पटेल के द्वारा सर्व प्रथम कार्यक्रम स्थल पर आगमन किया जाकर शोधार्थीयों के साथ समुह चित्र खिंचवाया गया। इसके पश्चात शोभा यात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि उच्च् शिक्षा मंत्री श्री इंदरसिंह परमार, सांसद श्री अनिल फिरोजिया, राज्य सभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, विधायक श्री अनिल जैन कालुहेड़ा, हार्टफुलनेस संस्थान हैदराबाद के संस्थापक पद्मभूषण श्री कमलेश डी. पटेल शामिल हुए।
समारोह में सर्वप्रथम राष्ट्रगान और विश्वविघालय का कुलगान गाया गया। अतिथियों के द्वारा मां वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।
स्वागत भाषण विक्रम विश्वविघालय के कुलगुरू आचार्य अर्पण भारद्वाज के द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के लिये यह हर्ष का विषय है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ीपड़वा) की पावन तिथि पर 'सिद्धार्थी' नामक नवसंवत तद्नुसार विक्रम संवत 2082 को 29वाँ दीक्षांत समारोह आयोजित हो रहा है। इस दीक्षांत समारोह में वर्ष 2024 के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर 99 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक, 02 शोधार्थियों को डी.लिट् एवं 70 शोधार्थियों को शोध उपाधियाँ प्रदान की जा रही हैं। साथ ही यह भी गौरव का विषय है कि हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय डॉ. मोहन यादव एवं पद्मभूषण से अलंकृत परम पूज्य श्री कमलेश डी. पटेल को डी.लिट् की मानद उपाधि से विभूषित किया जा रहा है।
दीक्षांत समारोह किसी भी विद्यार्थी के शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अवसर होता है। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा क्षण होता है जो विद्यार्थियों के परिश्रम, समर्पण और उपलब्धियों को मान्यता देता है। इस समारोह में उन्हें उनकी डिग्री या उपाधि प्रदान की जाती है, जिससे वे शिक्षा के एक महत्वपूर्ण चरण को पूरा कर आगे के जीवन की ओर अग्रसर होते हैं। दीक्षांत समारोह के बाद विद्यार्थी अपने करियर की यात्रा शुरू करते हैं। यह विद्यार्थियों के माता-पिता और शिक्षकों के लिए एक गर्व का क्षण होता है। एक निपुण विद्यार्थी सशक्त समाज की नींव होता है और राष्ट्र हित के लिए लाभकारी होता है।
विश्वविघालय के कुलगुरु प्रोफेसर भारद्वाज और कुल सचिव श्री अनिल शर्मा ने राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत पुष्पगुच्छ, शॉल, अश्वगंधा का पौधा और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। कुल परिषद के सदस्यों के द्वारा अन्य अतिथियों का भी सम्मान और स्वागत किया गया। इसके पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. यादव और हार्टफुलनेस संस्थान के संस्थापक श्री कमलेश पटेल को विश्वविघालय द्वारा डी. लिट् की उपाधि से अलंकृत किया गया। अतिथियों के द्वारा विश्वविघालय से प्रकाशित तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। इसके पश्चात विघार्थियों को उपाधि प्रदान कि गई।
उपाधि के पश्चात कुलगुरु के द्वारा सभी उपाधि प्राप्तकर्ताओं को उपदेश दिया गया तथा सभी को शपथ दिलवाई गई। इसके बाद विक्रम विश्वविघालय और हार्टफुलनेस संस्थान के बीच एम ओ यू का आदान-प्रदान किया गया।
श्री कमलेश पटेल ने इस अवसर पर कहा की योग की साधना करने पर पेहला फल विवेक और बुद्धी के रुप में प्राप्त होता है। हम सभी को अपने नकारात्मक गुणों को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए। ध्यान से ही हमारी प्रगति हो सकती है।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदरसिंह परमार ने कहा कि आज जिन विघार्थियों को दीक्षित किया जा रहा है वे सभी अपने ज्ञान का सदुपयोग समाज और देश की सेवा में करें। एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य में सबसे पहले नवीन राष्ट्रीय शिक्षा निति लागू कि गई थी। मध्यप्रदेश शासन द्वारा निरन्तर शिक्षा निति को और प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किये जाने पर कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन श्री वीरेंद्र चावरे ने किया और आभार प्रदर्शन कुल सचिव डॉ. अनिल शर्मा ने किया। इस अवसर पर विश्व विघालय के कार्य परिषद के सदस्य श्री राजेशसिंह कुशवाह, श्री रूप पमनानी, श्रीमति मंजुषा मिमरोट, श्री वरूण गुप्ता, डॉ. संजय वर्मा, श्रीमति सुषमा निगवाल एवं विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, अतिथि अध्यापक गण, दीक्षांत समारोह में उपाधि ग्रहण करने वाले विघार्थी और उनके अभिभावक गण मौजूद थे।
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