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विक्रमादित्यकालीन समाजोन्मुखी वित्त व्यवस्था अध्ययन प्रासंगिक : प्रो. भारद्वाज, कुलगुरु

वित्तीय साक्षरता पर जोर

वित्तीय जागरूकता एवं उपभोक्ता प्रशिक्षण पर एक कार्यशाला संपन्न

एनसीएफई-आरबीआई-सेबी के सहसंयोजन में विक्रम विवि में कार्यशाला हुई आयोजित 

उज्जैन। पं. जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, विक्रम विश्वविद्यालय ने विक्रमोत्सव 2025 के अवसर पर वित्तीय जागरूकता एवं उपभोक्ता प्रशिक्षण पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को वित्तीय साक्षरता और समावेशन के महत्व को समझाना था। यह आयोजन एनसीएफई, आरबीआई और सेबी के सहयोग से किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने किया। उन्होंने अपने उद्घाटन संदेश में बताया कि संयुक्त राष्ट्र संपोषणीय विकास लक्ष्यों में से वित्तीय साक्षरता एवं समावेशन के लक्ष्य का पालन करना विकासशील राष्ट्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्रो. भारद्वाज ने सम्राट विक्रमादित्य के समय की वित्तीय व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण बताया, जो समग्र प्रजा के हित में कार्य करती थी।

इस कार्यशाला में विभिन्न विशिष्ट वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। एसबीआई समूह के वरिष्ठ संपर्क प्रबंधक श्री नीतेश पांडे ने अपने बैंकिंग अनुभवों को साझा करते हुए विद्यार्थियों को वित्तीय निर्णय लेने की कला सिखाई। सेवानिवृत्त वरिष्ठ बैंक अधिकारी एवं परिवर्तन संस्था के अध्यक्ष श्री एस.एस. नारंग ने अपने चार दशकों के बैंकिंग अनुभव को विद्यार्थियों के साथ साझा किया।

इफको-टोकियों जनरल इंश्योरेंस कंपनी लि. के जिला समन्वयक श्री सुनील वर्मा और विपणन प्रमुख श्री हरिवंश शर्मा ने भी वित्तीय जागरूकता और उपभोक्ता प्रशिक्षण के लाभों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्मार्ट फाइनेंसिंग को व्यक्तित्व विकास से जोड़ते हुए विद्यार्थियों से लघु वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।

शासन योजनाओं पर जोर:

कार्यशाला की संयोजिका और रिज़र्व बैंक की रिसोर्स पर्सन श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सृजन योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और युवा उद्यमी योजना की विशेषताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता, निदेशक, जेएनआईबीएम ने वित्तीय साक्षरता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न विकास लक्ष्यों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को वित्तीय प्रबंधन में साक्षरता की भूमिका समझाई।

इस कार्यशाला में विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा, संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. कामरान सुल्तान, कार्य परिषद सदस्य प्रो. डॉ. दीपक गुप्ता, प्रो. डॉ. डी.डी. बेदिया, डॉ. सचिन राय, श्री राकेश खोती, और श्री गोविंद तोमर ने कार्यक्रम की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान कई छात्रों का विशेष योगदान रहा, जिनमें शोधार्थी अजय जायसवाल, अर्पित पोरवाल, दीपक साहू, एमबीए चतुर्थ/द्वितीय सेमिस्टर के विद्यार्थियों सहित पृथ्वीराज युवराजसिंह, आदित्य कनिष्का, अरविंद, मुकुल, ख्याति, कलि, पंकज, मेहा, तान्या, श्रेया और शिवानी शामिल थे।

कार्यक्रम का संचालन और आभार संकाय सदस्य डॉ. नयनतारा डामोर ने व्यक्त किया।

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