विश्व शून्य अपशिष्ट दिवस पर विक्रम विवि में जागरूकता अभियान, अपशिष्ट प्रबंधन और अन्न के सम्मान का संदेश
उतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए खाली में
शून्य अपशिष्ट जीवनशैली में रासेयो की मुख्यभूमिका - प्रो. डॉ. भारद्वाज, कुलगुरु
उज्जैन: संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विश्व शून्य अपशिष्ट दिवस के अवसर पर विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में शून्य अपशिष्ट जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रमुख वक्ताओं ने शून्य अपशिष्ट जीवनशैली की आवश्यकता और पर्यावरण पर इसके प्रभाव को लेकर अपने विचार साझा किए।
प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज, विक्रम विवि के कुलगुरु, ने इस अभियान की अध्यक्षता करते हुए कहा, "शून्य अपशिष्ट जीवनशैली का उद्देश्य अपशिष्ट को शून्य या न्यूनतम स्तर तक सीमित करना, वस्तुओं का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण करना, और एकल-उपयोग वाले उत्पादों से बचना है, जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।" उन्होंने विशेष रूप से भोजन की बर्बादी के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा, "घर में बचा हुआ भोजन हम खाते हैं, लेकिन सामाजिक समारोहों में अक्सर हम आवश्यकता से ज्यादा भोजन प्लेट में लेकर छोड़ देते हैं, जो बाद में डस्टबिन में चला जाता है। यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि सामाजिक असमानता को भी उजागर करता है, क्योंकि कई लोग एक वक्त का भोजन भी नहीं पा पाते।"
प्रो. डॉ. अनिल कुमार जैन ने भोजन की बर्बादी को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "भोजन की बर्बादी न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी दुखद है जिन्हें एक वक्त का खाना भी नहीं मिल पाता।"
इस मौके पर प्रो. डॉ. अनिल कुमार शर्मा, कुलसचिव, विक्रम विवि ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा शून्य अपशिष्ट जीवनशैली को बढ़ावा देने और भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से यह संकल्प लेने की अपील की कि वे अन्न का सम्मान करेंगे और जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने के लिए प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम में प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता, निदेशक, पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान ने संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित लक्ष्यों 6, 7, 11, 12, 13, 14, और 15 पर जोर दिया और बताया कि शून्य अपशिष्ट दिवस का उद्देश्य न केवल अपशिष्ट प्रबंधन है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
प्रो. डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा, विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग, ने भी इस पहल को सराहा और कहा कि "हमें न केवल अपनी व्यक्तिगत जीवनशैली में बदलाव लाने की आवश्यकता है, बल्कि समाज में शून्य अपशिष्ट जीवनशैली की आदतों को बढ़ावा देने के लिए भी हमें सक्रिय प्रयास करने चाहिए।"
कार्यक्रम के बाद, शहर के प्रमुख रेस्टोरेंट्स में एकत्रित होकर, उपस्थित सभी लोगों ने समूह के इस सराहनीय पहल की प्रशंसा की और शून्य अपशिष्ट जीवनशैली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान, रेस्टोरेंट्स में इस पहल को लेकर विचार-विमर्श हुआ और साथ ही, वहां पर उपस्थित सभी लोगों ने इस अभियान को जनमानस तक पहुंचाने का संकल्प लिया। यह कदम इस पहल को शहरभर में और व्यापक बनाने के लिए उठाया गया था।
कार्यक्रम में प्रो. डॉ. उमेश सिंह (संकाय अध्यक्ष), प्रो. डॉ. राजेश टेलर (डीन), प्रो. डॉ. अनिल कुमार जैन, प्रो. डॉ. संदीप तिवारी, प्रो. डॉ. डी. डी. बेदिया, डॉ. राज बोरिया, डॉ. विजय वर्मा (समन्वयक, राष्ट्रीय सेवा योजना), डॉ. कानिया मेड़ा (अध्यक्ष) सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों और कार्य परिषद के सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
डॉ. विजय वर्मा ने सुझाव दिया कि विक्रम विवि के होस्टल्स और परिसर में इस पहल को लागू करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और साथ ही शहर में शून्य अपशिष्ट जीवनशैली के संदेश को फैलाने के लिए होर्डिंग्स भी लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि इस पहल को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पत्रक तैयार किए जाएं, ताकि विश्वविद्यालय के सभी विभागों में इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाई जा सके।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. वीरेंद्र चावरे ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा, "यह कार्यक्रम न केवल विक्रम विवि के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बनेगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अपने संसाधनों का संरक्षण करें और उन्हें शून्य अपशिष्ट जीवनशैली के तहत सही तरीके से उपयोग करें।"
विक्रम विवि ने इस अभियान के दौरान संकल्प लिया कि वह भविष्य में भी शून्य अपशिष्ट जीवनशैली को अपनाने के लिए सक्रिय रूप से काम करेगा और समाज में बदलाव लाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
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