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विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर विशेष परिसंवाद का आयोजन

पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, विक्रम विश्वविद्यालय में विशेष परिसंवाद का आयोजन

विविधता में है जीवन और स्वास्थ्य की असली ताकत

विविधता पूर्ण हमारे अपराजित योद्धा - प्रो भारद्वाज, कुलगुरु

उज्जैन। पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में "विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस" पर विशेष परिसंवाद आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रो. डॉ. अर्पण भारद्वाज कुलगुरु ने कहा कि जीवन और स्वास्थ्य में असली ताकत हमारी विविधता में है। प्रत्येक मस्तिष्क अलग होता है, हर सोच अनोखी होती है और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

दुनियाभर में हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के बारे में जागरूक करना है ताकि समाज में ऑटिज्म से प्रभावित लोगों के जीवन को बेहतर बनाया जा सके और वे समाज में एक सम्मानजनक जीवन जी सकें।

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित इस दिन के प्रसंग में प्रो. डा. अर्पण भारद्वाज कुलगुरु ने पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान के निदेशक, स्टाफ और विद्यार्थियों को इस प्रकार के आयोजन पर हार्दिक बधाई दी और इसे सामाजिक सरोकारों की दिशा में एक अनुकरणीय पहल बताया।

इस वर्ष "न्यूरोडाइवर्सिटी और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य को आगे बढ़ाना" थीम पर केंद्रित इस विशेष परिसंवाद में समावेशी स्वास्थ्य सेवा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार के अवसर, असमानताओं को कम करने और ऑटिज़्म-फ्रेंडली शहरी विकास पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में प्रो. डॉ. धर्मेंद्र मेहता, निदेशक, पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान ने मीडिया रिपोर्ट्स के संदर्भ में कहा कि ऑटिज्म के चार प्रकार होते हैं: एस्परगर सिंड्रोम, चाइल्डहुड डिसइंटीग्रेटिव डिसऑर्डर, ऑटिज्म, और पर्वेसिव डेवलपमेंटल डिसऑर्डर। पेडियाट्रिक जर्नल्स में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, दुनिया भर में कई युवा और बच्चे ऑटिज्म से प्रभावित हैं। भारत में लड़कों की संख्या लड़कियों की तुलना में तीन गुना ज्यादा है।

ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो बचपन में शुरू होती है और इसमें व्यक्ति के वर्बल या नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन, इमेजिनेशन और सोशल इंटरेक्शन पर बुरा असर पड़ता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को बातें समझने में कठिनाई होती है, वे शब्दों को समझ नहीं पाते, आंखों में आंखें डालकर बात नहीं कर पाते और उनका बर्ताव अन्य लोगों से अलग होता है। ऐसे में उन्हें संवेदनशीलता और स्वीकृति देना हमारा मानव धर्म है।

इस अवसर पर प्रो. डॉ. कामरान सुल्तान, संकाय अध्यक्ष, विक्रम विवि, प्रो. डॉ. डी.डी. बेदिया, स्टाफ गोविंद तोमर, दिनेश सिंगार, ओम प्रकाश यादव, सत्यनारायण, शोधार्थी राकेश लाल, रीता जायसवाल, आमिर खान, युवराज सिंह, दीपांशु सलोनी राय, अवनी दुबे, पंकज जारोलिया, ख्याति मिश्रा, काव्या पंवार, कृषि अध्ययन शाला के विद्यार्थी विवेक रावल और उज्ज्वल पटेल ने भी अपने विचार व्यक्त किए और इस सामाजिक सरोकार को लेकर अपने दृष्टिकोण साझा किए।

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