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डॉ. अम्बेडकर आधुनिक युग के सामाजिक शिल्पकार हैं : प्रो. आशा शुक्ला
May 5, 2020 • BKK NEWS - बी.के.के. न्यूज़ (सम्पादक - राधेश्याम चौऋषिया) • विशेष आलेख
उज्जैन। डॉ. अम्बेडकर आधुनिक युग के सामाजिक शिल्पकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं। डॉ. अम्बेडकर एक समाज वैज्ञानिक थे। उन्होंने आर्थिक, राजनैतिक, विधिक एवं सामाजिक तथ्यों का विवेचन प्रत्यक्ष अनुभव एवं तटस्थ विश्लेषण के आधार पर किया। डॉ. अम्बेडकर ने परम्परागत सामाजिक ढांचे को संशोधित करने वाली वैचारिकी को मानवीय आधार पर तर्कसंगत समीक्षा की है। जिसमें लोकतांत्रिक समाजवाद की अवधारणा भेदभाव रहित समाज की स्थापना है। जिसमें मानव मानद का सम्मान हो। उनकी समाजवादी अवधारणा मानवता से संचालित होती है। आज समुदायवादी मानसिकता से ऊपर उठकर मानवतावादी मानसिकता की आवश्यकता है। आधुनिक लोकतांत्रिक सामाजिक ढांचे को पारिवारिक व सामाजिक समानता से स्थापित किया है।
 
उक्त विचार डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने डॉ. अम्बेडकर पीठ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।
 
प्रमुख आतिथ्य विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेन्द्र शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि लोकतांत्रिक समाजवाद गहरे सामाजिक सांस्कृतिक भावना के बिना संभव नहीं है। गणराज्य की पुरातन अवधारणा अब नए परिवेश में परिभाषित हो रही है, जिसमें अखंड राष्ट्रीयता का भाव है। इसमें सबकी समानता पर केन्द्रित व्यवस्था हो। डॉ. अम्बेडकर का समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का विचार ही लोकतांत्रिक समाजवाद का मूल है। सामाजिक स्वतंत्रता तभी संभव हो सकेगी, जब जाति दंश की समाप्ति होगी। डॉ. अम्बेडकर के प्रजातंत्र जीवन पद्धति है। उनके अनुसार राष्ट्र समाज सेवा का साधन है, जिसमें मिलजुल कर, सुख-दुख बांटकर रहना होगा। आर्थिक विषमता को समाप्त कर ही डॉ. अम्बेडकर के लोकतांत्रिक समाजवाद की स्थापना करना होगा।
 
आज के तकनीकी सत्रों में जिन विषय विशेषज्ञों व विचारकों ने अपने विचारों से वेबिनार सफल बनाया, उनमें प्रमुख रूप से अहमदाबाद गुजरात के प्रो. प्रदीप प्रजापत, डॉ. संभाजी काले कोल्हापुर महाराष्ट्र, डॉ. हुलेश मांझी पटना बिहार, डॉ. वी. शीरिषा सामाजिक अपवर्जन व समावेशी विभाग जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, डॉ. जितेन्द्र तिवारी वाराणसी, प्रो. जी.सी. खेमसरा मंदसौर, डॉ. मनु गौराहा उज्जैन, डॉ. गोरखनाथ पांडुरंग राव फालसे बीड, डॉ. डी.डी. शेखर मेदमवार उज्जैन, डॉ. मनोज कुमार गुप्ता बानीज महू, प्रो. सुनील गोयल अजंड (म.प्र.)। शोधार्थियों ने भी अपने विचार रखें। इनमें उड़ीसा की सुश्री मंजूषा मिश्रा, नार्थ ईस्टर्न विश्वविद्यालय, बारीपारा के साबूदेनु सेखर मिश्रा, जालौन (उ.प्र.) के प्रदीप कुमार, उज्जैन के धीरेन्द्र करवाल, कोल्हापुर के दयानंद राजा चिगलगांवकर, शिलांग से डॉ. संजीव कमार बरगेटा, डॉ. महेन्द्र यादव, जयपुर से डॉ. सुनीता सैनी। डॉ. अम्बेडकर पीठ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में नई दिल्ली, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटका, तमिलनाडु, बिहार, गुजरात, झारखंड, राजस्थान, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, शिलांग, छत्तीसगढ़, केरल और म.प्र. के १२५ प्रतिभागियों ने सहभागिता की। ३२ विषय विशेषज्ञों, विचारकों ने अपने विचारों से वेबिनार को सफल बनाया। कुल ई-पंजीयन १७२ का हुआ था। इसमें स्क्रीनिंग के बाद १२५ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उद्घाटन व समापन के साथ चार तकनीकी सत्र सम्पन्न हुए।
 
राष्ट्रीय वेबिनार का सम्पूर्ण संयोजन, संचालन शब्दाभिनंदन डॉ. अम्बेडकर पीठ के प्रभारी आचार्य डॉ. एस.के. मिश्रा ने किया। राष्ट्रीय वेबिनार का विशेष तकनीकी सहयोग व संचालन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के रशियन स्टडीज के सहायक प्राध्यापक डॉ. संदीप पाण्डेय ने किया। तकनीकी सत्रों का संचालन व आभार शोध अधिकारी डॉ. निवेदिता वर्मा ने किया।

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